"ट्रंप का टैरिफ अल्टीमेटम: 12 देशों को दी चेतावनी, नहीं मानी शर्तें तो लगेगा भारी टैक्स!”
📸 Image Credit: Gage Skidmore via Wikimedia Commons / CC BY-SA 3.0
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की ‘Take-it-or-leave-it’ नीति विश्व स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है। जो कि चारो तरफ बड़ी तेजी से वायरल हो रही है – और वो है अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दिए गए "टैरिफ अल्टीमेटम" की। ट्रंप अपनी खास व्यापारिक नीतियों के लिए जाने जाते हैं। उनकी सबसे चर्चित नीतियों में से एक है "टेक इट और लीव इट" (Take It or Leave It) यानी "या तो स्वीकार करो या छोड़ दो" की रणनीति।
इसमें साफ तौर पर ट्रंप दुआरा लिखा गया है कि अगर ये देश अमेरिका की शर्तें नहीं मानेंगे, तो उनके सामान पर भारी टैक्स लगाया जाएगा।
टैरिफ क्या होते हैं और इसका आम लोगों से क्या लेना-देना है?
टैरिफ का मतलब होता है किसी देश से आने वाले सामान पर टैक्स लगाना। जैसे अगर अमेरिका भारत से मोबाइल आयात करता है और उस पर 50% टैरिफ लगा देता है, तो वह मोबाइल अमेरिका में बहुत महंगा बिकेगा। इससे अमेरिकी कंपनियां और बाजार प्रभावित होते हैं, और आम पब्लिक पर भी इस चीज़ का काफी जादा असर पड़ेगा
"इससे भारत को नुकसान होगा, क्योंकि अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान महंगा हो जाएगा और बिक्री घट सकती है।”
पहले, ट्रंप प्रशासन ने 10% के मूल टैरिफ का प्रस्ताव किया था, जिसे कुछ देशों के लिए 50% तक बढ़ाया जा सकता था। अब, ट्रंप ने संकेत दिया है कि ये टैरिफ 70% तक भी जा सकते हैं। इसका मतलब है कि अमेरिका उन देशों को सीधे एक पत्र भेजेगा, जिसमें उनके निर्यात पर लगने वाले टैरिफ की दरें लिखी होंगी, और इन दरों पर कोई बातचीत नहीं होगी।
ट्रम्प ने ऐसी नीति क्यों बनाई
इस नीति के पीछे ट्रंप का कहना है कि अमेरिका को कई देशों के साथ "अनुचित व्यापार" का सामना करना पड़ रहा है। उनका मानना है कि दूसरे देश अमेरिका का फायदा उठा रहे हैं और वे चाहते हैं कि व्यापारिक रिश्ते अमेरिका के पक्ष में हों। ट्रम्प के इस फैसले में अब तक दो देश ही सहमत हुए हैं एक है U.K दूसरा है वियतनाम.वियतनाम ने अमेरिका के साथ अपनी टैक्स दर 46% से 20% कर दी है।साथ में एह डील भी है कि वो अपने बाजार में यूएसए के प्रोडक्ट को ज्यादा प्राथमिकता देंगे। ट्रंप कि नीति एक आक्रामक और सीधी रणनीति है, जिसका उद्देश्य अमेरिका के व्यापारिक रिश्तों को उसके पक्ष में लाना है।
इस नीति का असर कहा-2 पर पड़ेगा
इस टैरिफ योजना के कारण दुनिया भर के निवेशकों में भी डर है। क्यूकी काई देश एक दूसरे से माल आयात या निर्यात करते है ,जिस्से बाजारों में हलचल है, स्टॉक गिर सकते हैं और कंपनियों के शेयर नीचे आ सकते हैं। इससे दुनिया भर के लोगों के रोजगार पर सीधा और आर्थिक स्थिति पर असर पड़ सकता है। अगर व्यापार घटता है, तो फैक्ट्रियां बंद हो सकती हैं, नौकरियां जा सकती हैं और महंगाई बढ़ सकती है।
1. व्यापारिक रिश्तों में तनाव
इस तरह की सख्त नीति से देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में तनाव आ सकता है। बहुत से देशों की सरकारें इस कदम को अनुचित मान रही हैं। और अपने जवाबी कदमों पर विचार कर रही हैं
2. वस्तुओं की कीमतें बढ़ेंगी
जब एक देश दूसरे देश के सामान पर ज्यादा टैक्स लगाता है, तो वह सामान महंगा हो जाता है। जैसे – अमेरिका अगर दक्षिण कोरिया की कारों पर 60% टैरिफ लगाता है, तो वे कारें वहां बहुत महंगी हो जाएंगी। इससे वहां के लोग उन्हें खरीदना बंद कर सकते हैं, और कोरियन कंपनियों को नुकसान होगा। इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा क्योंकि कोरिया अपनी कार प्रोडक्शन पर रोक लगा देगा और लोगों का रोजगार कम हो जाएगा।
3. ग्लोबल सप्लाई चेन में गड़बड़ी
आज की दुनिया में कोई भी चीज एक ही देश में पूरी manufacturer होती । मोबाइल, कंप्यूटर, कार इन सबके पुर्जे अलग-अलग देशों में बनते हैं और फिर एक जगह assemble होते हैं। उसके बाद ही कोई आइटम complete बनती है अगर अमेरिका की इस नीति का कोई भी समाधान नहीं होता तो आगे चल कर एक बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है,जिसकी वजह से देशों के बीच व्यापार रुकता है, तो ये सामान बनना और पहुंचाना मुश्किल हो जाएगा।
4. कंपनियों और नौकरियों पर असर
अगर कंपनियों को नुकसान होता है, तो वे अपने खर्चे घटाएंगी जिसका सीधा असर नौकरियों पर पड़ेगा। बेरोजगारी बढ़ सकती है और नई नौकरियां मिलना मुश्किल हो सकता है। ग़रीबी और भुखमारी पहले से काफी बढ़ जायेगी। बहुत सी चीजें जो आज सस्ती मिल रही हैं, वह महंगी हो जाएंगी।
5. शेयर बाजारों और निवेश पर असर
ट्रंप की इस योजना के बाद दुनिया के कई शेयर बाजारों में हलचल देखी जा रही है। निवेशक डरे हुए हैं कि अगर यह नीति लागू होती है, तो कंपनियों की कमाई कम हो सकती
6.भारत जैसे देशों के लिए ये चिंता की बात
भारत में USA कृषि और डेयरी बाजार तक पोहोंच चाहता है। भविष्य में अमेरिका का जितना भी भारत के साथ लेन देन चल रहा है अगर वो रुका तो एह काफी चिंता की बात है। इससे भारत की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ेगा। तो इन क्षेत्रों को नुकसान हो सकता है:
स्टील और इंजीनियरिंग उत्पाद
दवाइयाँ (pharmaceuticals)
कपड़ा और गारमेंट्स
निष्कर्ष:
"टैरिफ डेडलाइन" एक अमेरिका द्वारा दुनिया को दी गई चेतावनी है:
"अगर मेरी शर्तें नहीं मानी, तो मैं व्यापार पर टैक्स लगा दूंगा!”


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